Friday, September 20, 2013

रिजर्व बैंक ने बढ़ाई रेपो दर, शेयर बाजार चौंका और रूपया लुढ़का

रिजर्व बैंक ने बढ़ाई रेपो दर, शेयर बाजार चौंका और रूपया लुढ़का

Friday, 20 September 2013 15:07

मुंबई। रिजर्व बैंक के नये गवर्नर रघुराम गोविंद राजन ने आज नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत वृद्धि कर बाजार और उद्योग जगत को भौचक कर दिया। इस अप्रत्याशित घोषणा पर शेयर बाजार और विदेशी विनिमय बाजार में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई।
रिजर्व बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये यह कदम जरूरी था। पर इस निर्णय से ब्याज दरें बढ़ेंगी और मकान, दुकान और वाहनों के लिये कर्ज और महंगा हो जायेगा। 
राजन ने मौद्रिक नीति की अपनी पहली समीक्षा में आक्रमक मौद्रिक नीति का विकल्प ही चुना। त्यौहारी मौसम शुरू होने से पहले सभी को ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थी और उम्मीद थी कि नए गवर्नर आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा दिये की पहल करेंगे।  
राजन ने रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया। इस लिहाज से रिवर्स रेपो 6.5 प्रतिशत पर होगा। बैंकों की फौरी जरूरतों के लिये सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) पर हालांकि, ब्याज दर को 0.75 प्रतिशत घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो जायेगा। यह निर्णय 21 सितंबर से प्रभावी होगा। 
नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर के मामले में भी बैंकों को कुछ राहत दी गई है। सीआरआर दर 4 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई है लेकिन इसके तहत औसत नकदी को 99 प्रतिशत से घटाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया है। बैंकों का कहना है कि फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत और व्यावसायिक कर्ज महंगा होने की संभावना नहीं दिखती। बंबई शेयर बाजार का एस एंड पी बीएसई सेंसेक्स मौद्रिक समीक्षा घोषणा के तुरंत बाद 595 अंक टूट गया था। घोषणा के असर डालर के मुकाबले रूपया 69 पैसे लुढ़कर 62.46 रूपये प्रति डालर हो गया। 

मौद्रिक नीति में कहा गया है ''मुद्रास्फीति धारणा पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। औद्योगिक क्षेत्र और शहरी मांग की कमजोर स्थिति को देखते हुये यह जरूरी है। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रख मुद्रास्फीति को वहनीय स्तर पर लाने के लिये रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाना आवश्यकता हो गया था।''
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा ''रेपो दर में वृद्धि से बचा जा सकता था। उद्योग पहले ही पूंजी की ऊंची लागत के दबाव में  हैं। नकदी की स्थिति भी काफी सख्त है ऐसे में रेपो दर में वृद्धि चौंकाने वाली है।''
देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक स्टेट बैंक ने कल ही अपनी आधार दर को बढ़ाकर 9.8 प्रतिशत किया है। 
केनरा बैंक के कार्यकारी निदेशक ए.के. गुप्ता से जब मौद्रिक नीति के असर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ''ब्याज दरों पर तुरंत कोई असर नहीं होगा।'' उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने संतुलन बिठाने का प्रयास किया है। बैंक ज्यादातर नकदी एमएसएफ के जरिये प्राप्त करते हैं। इसमें 0.75 प्रतिशत कमी से लागत कम होगी। 
रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि उचित नीतिगत उपायों के अभाव में मुद्रास्फीति वर्ष की शेष अवधि में ऊंची रह सकती है। ''चिंता की बात यह है कि खुदरा मुद्रास्फीति भी पिछले कई सालों से लगातार उच्चस्तर पर है। इससे उच्चस्तर पर मुद्रास्फीति प्रत्याशा को मजबूती मिलती है और दूसरी तरफ उपभोक्ता और कारोबार विश्वास कमजोर पड़ता है।''

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