Sunday, April 29, 2012

Fwd: वे जो कलक्टर नहीं बन सके



---------- Forwarded message ----------
From: reyaz-ul-haque <beingred@gmail.com>
Date: 2012/4/29
Subject: वे जो कलक्टर नहीं बन सके
To: jaanib@googlegroups.com


आंकड़ों में 16 मार्च, 2011 को ताड़मेटला में 7 साल के एक बच्चे को सैन्य बलों ने पीटा, यह दर्ज नहीं है, हवाई फायरिंग सुनकर गांव के कितने लोग भागे, यह भी दर्ज नहीं है. कुछ गैर सरकारी दस्तावेजों और पत्रिका की रिपोर्टों में 207 घरों का जलाया जाना दर्ज है. आंकड़ों में घटित हुई इन घटनाओं ने हर आदमी को क्रोधित किया, आंकड़े में हर आदमी गुस्से में है, आंकड़े में उसकी उग्रता स्वाभाविक है और इस संगठित उग्रता में हर आदमी उग्रवादी है. देश और सरकार के दस्तावेजों में इनसानी स्वभावों के आंकड़े नहीं दर्ज किए जाते. तो क्या 'शांति अभियान'=तबाही. डिक्शनरी देख सकते हैं. राज्य सरकार 'शांति-अभियान' चलाती है और देश की सर्वोच्च न्यायालय एक फैसले में उसे तत्काल बंद करने का आदेश देती है. राज्य शान्ति चाहता है? न्यायालय शांति नहीं चाहता? शांति और न्याय एक दूसरे के विरुद्ध कैसे हैं? ऐसे ढेरों सवाल.

वे जो कलक्टर नहीं बन सके



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